Kerala Flood

केरल के बाढ़ग्रस्त लोगों को फेडरेशन ऑफ ऑलइण्डियाकेटरर्सकी ओर से सहायता

हाल ही में हमारे देश के केरल राज्य में प्राकृतिक विपत्ति के रूपमें जबरदस्त बाढ़ आई।15 अगस्त 2018 से मानसून के मौसम के दौरान असामान्य रूप से उच्च वर्षा के कारण गंभीर बाढ़ ने दक्षिण भारतीय राज्य केरल को प्रभावित किया। यह लगभग एक शताब्दी में केरल में सबसे खराब बाढ़ थी। 483 से ज्यादा लोग मारे गए, और 15 गायब हैं।मुख्य रूप से चेंगानूर, पांडानाद, एडानाद, अरनमुला, कोझेनचेरी, अयूरूर, रानी, पांडलम, कुट्टानाद, अलुवा और चालाकुडी, एनपरावुर, चेन्दामंगलम, एलूर और वैपिन द्वीप के कुछ स्थानों से कम से कम दस लाख लोगों को स्थानांतर किया गया।राज्य के सभी 14 जिलों को लाल चेतावनी पर रखा गया था। केरल सरकार के मुताबिक, केरल की कुल आबादी का छठा हिस्सा बाढ़ और संबंधित घटनाओं से सीधे प्रभावित हुआ था। भारत सरकार ने इसे स्तर 3 आपदा, या “गंभीर प्रकृति की आपदा” घोषित कर दी थी। केरल में 1924 में हुई बड़ी बाढ़ के बाद यह सबसे खराब बाढ़ है।

इतिहास में पहली बार राज्य के 54 बांधों में से 35 खोले गए थे। 26 वर्षों में पहली बार इडुक्की बांध के सभी पांच ओवरफ्लोगेटएक ही समय में खोले गए थे। वायनाड और इडुक्की में भारी बारिश ने गंभीर भूस्खलन पैदा किए और पहाड़ी जिलों को अलग कर दिया। प्रधान मंत्री ने नियमित रूप से निगरानी की, और राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति ने बचाव और राहत कार्यों का समन्वय किया।33,000 लोगों को बाढ़ सेबचाया गया है।

केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने तीव्र बाढ़ के परिणामस्वरूप राज्य को रेडऎलर्टमें रखा है। बहुत सारे जल प्रशोधन यंत्रोंको बंध रखना पडाजिसकी वजह से मुख्य रूप से राज्य के उत्तर प्रांतों मेंशुद्ध पीने के पानी का अकाल पडा।बाढ़ पीड़ितों को समायोजित करने के लिए विभिन्न स्थानों पर 3,274 से अधिक राहत शिविर खोले गए हैं। अनुमान है कि इस तरह के शिविरों में 12,47,496 लोगों को आश्रय मिला है। बाढ़ ने सैकड़ों गांवों को प्रभावित किया है, अनुमानित 10,000 किमी (6,200 मील) सड़कों को नष्ट कर दिया है और हजारों घरों को क्षतिग्रस्त या नष्ट कर दिया गया है।

केरल की राज्य सरकार ने पीड़ितों की सहायता के लिए वेबसाइट शुरू कि है।प्रधान मंत्री जी ने रू. 1,500 करोडसे भी ज्यादा की सहायता घोषित कि है।पूरे देश और विश्व में जहां भी भारतीय बसे है वहां से जो जितनी कर सके उतनी सहायताकर रहा है।

ऐसे में हम FAIC कैसे पीछे रह सकते है? हमने इस मानवीय सहायता के अभियान में रू. 11 लाख का एक छोटा सा अनुदान देकर इस विपत्ति की ओर हमारी संवेदनशीलता व प्रतिबद्धताका परिचय दीया है। हमारे इस निर्णय को सर्वसम्मति से और निर्विवाद रूप से स्वीकारा गया है जिसके लिए हम सभी के आभारी है।